Monday, 21 January 2019

Chali ja rahi hai umar dheere


चली जा रही है उमर धीरे धीरे ,
सुबह शाम दोपहर धीरे धीरे |

लड़कपन भी बीता जवानी भी बीती ,
बुढ़ापे का हो रहा असर धीरे धीरे |
चली जा रही है .....

गिरे दाँत तेरे हुए केश उजले,
झुकी जा रही है कमर धीरेधीरे  |
चली जा रही है .....

अगर चाहते हो कल्याण अपना,
भजो राम आठों पहर धीरे धीरे |
चली जा रही है .....

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